Sunday, September 28, 2008

Believe where others doubt , Work where others refuse , Save where others waste , Stay where others quit And you will win where others lose .......................
If you want to see how rich you are, then don't count your money. just drop a tear from your eye and see how many hands come to hold it .....................

Tuesday, September 16, 2008

Happiness is like a butterfly , u run after it , it flies away bt if u stand still , it comes and sit on ur shoulder .

Wednesday, September 3, 2008

जो बुरी घटनाएं बीत चुकी हैं उन्हें भूल जाना ही अच्छा है नहीं तो वे आपके आने वाले कल को भी बरबाद कर देंगी , बल्कि उनसे सबक लेते हुए अपने आज को सवारना चाहिए ।

(कमला भंडारी)
आसान रास्तों पर हमसफ़र की कमी नहीं होती और
कठिन रास्तों पर हमसफ़र मुश्किल से ही मिलते हैं ।

अपनी बुराइयां अपनों से ही जान लो व ठीक करने की कोशिश करो , दूसरा कहेगा तो बहुत बुरा लगेगा व शर्मिंदा भी होना पड़ेगा ।

(कमला भंडारी )

Sunday, August 3, 2008






कुछ दिनों पहले मैं गोपेश्वर गई थी । पेश हैं आपके लिए वहां के कुछ द्रश्य ।

Monday, July 28, 2008

people and things

" people are made to be loved and things are made to be used " . But the confusion is in the world because people are being used and things are being loved.

Sunday, July 27, 2008

अस्तित्व ----------


कहते हैं इस दौर में लड़कियाँ

बहुत आगे हैं बढ़ रही

कोई छू रही आसमान तो

कोई धरती की गहराई है नाप रही

कोई जीवन दान दे रही तो

कोई दूसरे का आशियाँ है बना रही

कोई दूसरो के हक़ के लिए लड़ रही तो

कोई दहेज़ है एक अभिशाप का पाठ सबको पढ़ा रही

कोई अपना रही बेसहाराओ को

और पराये का भेद मिटा रही ,

तो कोई आज देश की

प्रधानमंत्री , रास्ट्रपति बन

बागडोर संभाल रही ,

पर कौन जाने क्या हो सच

उन पर भी तो हो सकती है कोई मुशीबत

क्या गारंटी है की

जो छू रही आसमान

उसे किसीने धरती पर न पटका हो

और जो गहराई है नाप रही

उसे कोई जख्म न गहरे दे जाता हो

जो जीवन दान दे रही ,घाव भर रही

कौन जाने उसे ही जीने के लाले हों ,

और शरीर पर जाने कितने ही

निशान घाव के गहरे हों ,

जो बना रही दूसरो का आशियाँ

हो सकता है वो ख़ुद ही

सर छुपाने की जगह हो ढूंड रही ,

लड़ रही है जो दूसरो के हक़ की लड़ाई

कौन जाने उससे ही सब लड़ते हों हक़ की लड़ाई ,

दहेज़ है एक अभिशाप

पाठ जो सबको पढा रही

हो सकता है उसके ही ब्याह मे

हो दहेज़ की भारी मांग हो रही ,

जो अपना रही बेसहाराओ को

क्या गारंटी है की

उसका भी कोई सहारा हो

या हो सकता है की सबने

उसको ही पराया कर डाला हो ,

जो कल थी देश की प्रधानमंत्री ,

आज है रास्ट्रपति ,

क्या हो नहीं सकता की

उसकी दुनियाँ भी हो विरान सी

दुखती हो उनकी भी आँखे

पर दिखा नहीं वो पाती हों

क्युकी आज हैं वो

देश के सर्वश्रेष्ठ पद पर ।

Friday, July 25, 2008

आजकल बरसात का मौसम है । घर के बाहर निकलना भी दूभर हो रहा है । सड़क मै जहाँ देखो पानी ही पानी भरा हुआ है, गड्ढे पड़े हुए है । कितनी मुस्किलो का सामना करना पड़ रहा है आम इंसान को । इन नेताओं से कितना भी कहा जाए इनके कान मै जू तक नही रेंगती । अब तो लगता है ये ढीट नेता तब तक नही सुधरेंगे जबतक .......इनके घर के ठीक सामने १० फीट गहरा गड्ढा न खोद दिया जाए वो भी २-३ किलोमीटर तक । तब जाकर शायद इन्हे पता चल पाये की आम जनता ख़राब सड़क के कारण किन - किन परेशानियों का सामना करती है । और हाँ इनके घर के आगे की सड़क को तब तक न बनने दिया जाए जबतक ये आम रास्तो को ठीक नही कराते। आख़िर ये क्यों नही समझते की एक बार अच्छा माल लगा देंगे तो इन्हे बार-बार गालियाँ नही मिलेंगी । शायद इसलिए की माल सड़को पर लगा दिया तो ख़ुद क्या खाएँगे ? सही कहा न !