Wednesday, May 21, 2008

क्या हर आदमी यू ही आतंकवादी बनता जायेगा ?


आतंकवाद ,

है बहुत बडा विवाद

घिन करते है इससे सब

फिर जाने क्यों, कब

आतंकवादी बन जाते है

खून , कत्ल , तमंचा , हतियार

लूट-पाट और बलात्कार

करते है इससे जुड़ने से इनकार

फिर एक दिन अचानक

जाने क्यों इनके हो जाते है

जो रोते थे कभी

खून देखकर,

आज दूसरो के साथ

खूनी होली खेल मुस्कुराते है

थे ये भी कभी इंसान

जो आज आतंकवादी कहलाते है

कई शौक मै तो कई मजबूरी मै

इसे अपनाते है

किसी ने छीना इनका घर

इनकी दौलत, इनका गुरूर , इनका परिवार

उसी की खातिर अब

ये औरो का घर उजाड़ते है

वैसे कौन ऐसा होगा जो

सब चुपचाप सहता जायेगा

अपने सामने बहन की इज्जत लुटते देख

क्या भाई का खून नही khaul जायेगा

और उसी का बदला लेने की खातिर

वह भी आतंकवादी बन जायेगा

फिर किसी बहन की इज्जत लूट

वह अपनी कसम निभाएगा

और फिर बहन की इज्जत लुटते देख

कोई भाई आंतकवादी बन जायेगा

इसी तरह यह क्रम यू चलता ही जायेगा

बदले की आग मै निर्दोष भी

मौत के घाट उतरता जायेगा ।

पर क्या , इस तरह निर्दोष की जाने लेकर

सही मायने मै कोई

अपना बदला ले पायेगा
और क्या हमपर हरदम

इसी तरह ,

आतंकवाद का साया लहरायेगा

अपना- अपना बदला लेने की खातिर या ,

जल्दी पैसे कमाने की खातिर,

क्या हर आदमी यू ही

आतंकवादी बनता जायेगा ?

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