Sunday, March 23, 2008

हमारा समाज


हजारो साल पहले कहा गया था की जिस समाज मै नारियों की पूजा होती ही ,वही देवताओं का निवास होता है ।
हालाकि महिलाये आज जीवन के हर छेत्र मै आगे निकल रही है । दोलत ,इज्जत और सोहरत कमा रही है । उनके तनमन -धन पर आज उनका अधिकार है। लेकिन यह मुट्ठी भर महिलावो की कहानी है ज्यादातर महिलाये टू आज भी पुरुसो के रहमोकरम पर जी रही है । उनका ना टू तन अपना है और ना ही मन । रही बात धन की टू इस मामले मै वह पूरी तरह bediyo मै bandhi है । कुछ भी करना हो,कुछ भी khridna हो अपने पति से टू puchna ही पड़ता है ।
jabtak eshi महिलावो को jeene की पूरी aajadi नही होगी ,tabtak nyaypoorn समाज की sthapana असंभव है.

1 comment:

हरे प्रकाश उपाध्याय said...

aap achchha sochti hain....pahli bar idhr aaya...achchha lga...aata rhunga...